Sunday, February 24, 2013

चंद ख्‍वाब


बड़ी तबियत से देखे थे चंद ख्‍वाब हमने,
नजर न लगे इस डर से कभी बयां न किए,
मगर आज उनकी लाश पड़ी है सामने,
कल रात ही ख्‍वाब दम तोड़ चुके थे।

हक से ज्‍यादा नहीं मिलता सुना था लोगों से
मगर हमने औकात से ज्‍यादा ख्‍वाब देखे थे ।
चलो अच्‍छा हुआ जो भी हुआ,
ये सोच कर भी दर्द कम नहीं होता ।
ऐ खुदा तू ही तरस कर मुझ पर
दर्द सीने में दफन करने का हुनर दे। 

1 comment:

  1. Richa.Khwab to har INSAN dekhta hai, magar sach bahot kam logo ka hota hai?Lekin aapke jazbe ko salam...Mujhe Fakhr hai ki aap meri dost ho...

    ReplyDelete