Sunday, February 24, 2013


माना मेरे किस्‍मत में नहीं कि तेरे साथ रहूं,
हर रोज तेरे घर लौटने को इंतजार करूं,
घर आकर तुझसे जमाने की शिकायत करूं,
दिन का बोझ रात तेरे कंधों पर रख दूं।
माना ऐसे तमाम पल मेरे किस्‍मत में नहीं,
मगर तू ही बता क्‍या मैं इनके लायक नहीं

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