मुझे
मालूम था अपना दर्द कल भी और आज भी,
मगर
तुम साथ रहोगे…
यह
सोचा जी लूंगी तकलीफ की चादर में सिमट कर भी।
मगर
तुम साथ होकर भी आज साथ छोड़कर चल रहे हो,
क्या
सोचते हो चली जाऊंगी तुम्हें छोड़कर कहीं !
माना
बहुत मुश्किल है किसी का हक तुम पर देखना
मगर
नामुमकिन है तुम्हारे बिना जिंदगी जीना…
यही
सोचकर किया था फैसला मैंने कल,
और
कायम हूं उसी फैसले पर आज भी !
शायद
जिंदगी कर रही है मेरी आजमाइश…
मगर
जब भी जिंदगी जियेगी मेरी जिंदगी का एक कतरा,
खामोश
टीस उठेगी अपने प्यार पर देख किसी और का हक भी !

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