तपती
गर्मी से निजात दिलाने के लिए मानसून ने फिर एक बार दस्तक दे दी। यूं लगा जैसे
मुझ पर बिजली गिरी हो। तुम्हारे साथ बारिश की कोई याद तो नहीं जुड़ी अब तक लेकिन मेरे
अंदर तमाम ख्वाब आज भी जिंदा है। जिनमें बारिश में भीगते हम दोनों एक हो गए हैं। तम्हें
मालूम है… एक बार फिर मैं तपती धूप में अपने ख्वाब तुम्हारे
ख्यालों की बारिश में भीग कर लिख रही हूं।
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