Sunday, June 2, 2013

बारिश


तपती गर्मी से निजात दिलाने के लिए मानसून ने फिर एक बार दस्‍तक दे दी। यूं लगा जैसे मुझ पर बिजली गिरी हो। तुम्‍हारे साथ बारिश की कोई याद तो नहीं जुड़ी अब तक लेकिन मेरे अंदर तमाम ख्‍वाब आज भी जिंदा है। जिनमें बारिश में भीगते हम दोनों एक हो गए हैं। तम्‍हें मालूम है एक बार फिर मैं तपती धूप में अपने ख्‍वाब तुम्‍हारे ख्‍यालों की बारिश में भीग कर लिख रही हूं। 

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