करियर और शादी, दोनों ही लड़की की जिंदगी में खास होते हैं। फिलॉसफी में कहें
तो शादी जमीं तो करियर आसमान होता है। बस अपने आसमां तक पहुंचने की इजाजत हर लड़की
को नहीं होती है। लेकिन अब वक्त करवट बदल रहा है, लड़कियां शादी से पीछे नहीं हट
रहीं लेकिन करियर को पहले रख रहीं हैं। शायद इसलिए कि पति तो मिल ही जाएगा मगर
करियर का वक्त शादी के बाद नहीं। इस सोच के पीछे की असली वजह कभी सोची है ? अचानक पति परमेश्वर
को दूसरा दर्जा कब मिल गया। लड़की की जिंदगी के लीड हीरो को सपोर्टिंग रोल कैसे
मिल गया। जिस लड़की को बचपन से परिवार और संस्कार सिखाए जाते हैं वह अचानक अपने
लिए नए नियम बनाना क्यों चाहती है?
वजह कई हैं मगर जो अहम है वो है मेंटली आजाद होने की आजादी। कह सकते हैं वजह
दो हैं इमोशनल और प्रेक्टिल। इमोशनल पहलू है कि एक छोटे से शहर से जो लड़की आगे
बढने के लिए इतने जोश में है कि किसी की सुनना नहीं चाहती, बस अपना मुकाम पाना चाहती
है। शादी को उसने किनारे कर दिया है क्योंकि उसने अपने आस-पास ऐसी औरतों को देखा
है जो खुश है मगर कहने को। किचन में क्या आएगा वो डिसाइड कर सकती हैं मगर बच्चे
का करियर नहीं। क्योंकि मामला गंभीर है और इसका फैसला पति मतलब पिता लेगा।
उसने अपनी मां के अंदर दिल के किसी कोने में भी एक मुरझाया- सा सपना आज भी
पड़ा देखा है। जिसने शादी के साथ दम तोड़ दिया था। कब सपने बच्चों और पति में बदल
गए खुद उसे ही पता नहीं चला है। आज वो अपने सपनों को बच्चों में जी रही है। हर
लड़की ने इस वक्त को अपने घर में या फिर किसी करीबी के साथ् देखा है। यह बहुत
खास वजह भी है जो उसने आज शादी से तौबा करके पहले सपने पूरे करने का वादा खुद से
किया है। करियर में उसे आज सिर्फ औहदा ही नहीं चाहिए बल्कि एक फइनेंशली फिट लाइफ
चाहिए। जिससे वह कल अपने बच्चों के लिए फैसले ले सके सिर्फ उसकी राय औपचारिकता के
लिए नहीं मांगी जाए। साथ ही जब बच्चे मां के बारे में सोचे तो मां पर दया और
सहानूभूति नहीं गर्व हो।
दूसरी प्रैक्टिकल वजह है लड़कियों का लड़कों से आगे खुद को साबित करना। जिसके
लिए मां-पापा और समाज जिम्मेदार है। जिनका एक सूत्री कार्यक्रम है लड़की को लड़की
होने का एहसास कराना। यहां मत जाओ, वहां मत जाओ, जाओं तो शाम होने से पहले घर आओ।
कॉलेज भाई छोड़ आएगा। फिर चाहे भाई कालेज
की लड़कियों को छेड़ता पाया जाए। सबसे बड़ी मुसीबत लड़का किसी अनजान से बात करे तो
कम्यूनिकेशन बना रहा है और लड़की बात करते मिले तो पड़ोसी घर पहुंचकर कहेंगे शादी
कर दो लड़की बड़ी हो गई है। इतनी मुसीबत कि दिमाग का दही हो जाए और लगे ऐ खुदा तूने
लड़की क्यों बनाया ।
मगर इन सब से छुटकारा पाने का एक ही तरीका है, जिसे आज अपनाया गया है। खुद की
पहचान बनाओ क्योंकि रास्ता बताने कोई नहीं आता रास्ते खुद बनाने होते हैं। इसी
को गांठ बांध आज की लड़की चल पड़ी है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। हां अब बात आती
है सही वक्त पर शादी की, तो क्या बुरा है शादी उस वक्त करना जब उसे खुद पता हो
कि उसकी शादी है। अपनी मां, ताई , बुआ, चाची की तरह वो नहीं चाहती कि बच्चों से कहे
जब शादी हुई तो हमें पता ही नहीं था। उसे सिर्फ रिश्ते को निभाना नहीं किसी के
साथ जीना है। बड़ी अजीब कशमकश होती है जिंदगी की शादी। आज एक लड़की उसे
समझकर अपनाना चाहती है । अगर समाज का एक वर्ग गलत मानता है तो उसे यह सोचना होगा जब
परिपक्व बनना है तो गलतियां भी होंगी और सही रास्ता भी मिलेगा। एक बार उस लड़की
की नजर से भी देखा जाए जो समाज का ही हिस्सा है। जो लोग आज भी नहीं समझे उन्हें
समझना होगा। शादी करने से पहले उसे करियर का पायदान पार करना है, करवाचौथ रखने से
पहले करियर बनाना है।


