कभी सोचा है एक इंसान की जिंदगी और पिज्जा में एक जैसा क्या है। सवाल अजीब है मगर मुझे दोनों ही एक जैसे लगते है। क्योंकि पिज्जे के टुकड़ों की तरह हमारी जिंदगी भी टुकड़ों में बटी होती है। जिसमें एक हिस्सा मां-पापा के नाम, दूसरा पति के नाम, तीसरा समाज के नाम, चौथा भाई-बहन के नाम, पांचवा आफिस में कुर्बान। इतने टुकड़ों में बंटे होने के बाद भी जिंदगी से कोई खुश नही। कभी सोचा है इन सबके बीच इस पिज्जा में हमारे नाम का सॉस भी नहीं होता । लेकिन कहने को जिंदगी हमारी है जिसमें नाम जरुर हमारा है मगर हक नही है। ऐसे ही एक परेशान इंसान से मैं सुबह उठते ही मिली, मिलकर लगा चलो हम-सा कोई तो है यहां। जिसे गम बताकर हम भी रो लेंगे, रात भर किसी के कंधो पर अपने गम का बोझा रखकर सो लेंगे। तभी आंखे ढ़ग से खोली तो देखा यहां भी धोखा हो गया है। ये कोई हम जैसा नही आईने में हमारा ही चेहरा है। फिलहाल कोई चारा नही था, सबको अपना समझकर जिंदगी के एक खूबसूरत दिन का स्वागत करना था। जिसकी शुरुआत आफिस के नाम थी और शाम तक इस पिज्जे को खाने वालों की लंबी कतार थी।
Sunday, March 25, 2012
Saturday, March 3, 2012
jindagi
एक औरत की जिंदगी बडी मामूली सी होती है। हजारों रंग होते है फिर भी बेरंग होती है।किसी की ख्वाहिश और किसी की उम्मीद बनकर वो हमेशा जीती है। माना ये सबको मालूम है। लेकिन ये चीजें बदलती क्यूं नही है। क्यूं जरूरी होता है कोई सहारा कोई प्यार बनकर उसके साथ चले। आखिर क्यूं किसी को अकेला छोडने में उसे तकलीफ होती है। आज मेरे जहन में ये सवाल उठे है, या हकीकत कहूं तो एहसास हो रहा है। ये भी एक रंग है अच्छा हो या बुरा ईश्वर का दिया तोहफा है। जिसमें मुझे कोई शिकायत नही कोई मलाल नही है।
अब जिंदगी बस इंतजार लगती है जिसके पूरे होने की उम्मीद करने की ख्वाहिश नही ............
अब जिंदगी बस इंतजार लगती है जिसके पूरे होने की उम्मीद करने की ख्वाहिश नही ............
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