कई दिनों से थकान है, किसी को कहूं तो कहेगा आराम कर लो। लेकिन क्या बताऊं अब
खुद ही उठने का दिल नहीं। बस लगता है पड़े रहने दो जस का तस। कोई आवाज भी मत देना
हो सके तो कोई खैरियत भी मत पूछना। क्योंकि इसी वजह ने आज जिंदगी तबाह कर दी है। सोचते
– सोचते कमबख्त थक गए हैं कि कोई अपना हो, किसी को अपना कहे। कोई फिक्र करे, कोई
साथ चले। किसी को तो मेरी खामोशियों की चीख भी सुनाई दे। लेकिन कब तक मैं यह
बोलती रहूं। अब बस चुप और कोई आवाज नहीं, न बोलना है न सुनना। जाओ छोड़ दिया खुद
को, अब नहीं संभलना।

bahot khoob hai Richa.
ReplyDelete"Ab bus Chup" .. Manas (manaschhabra@gmail.com)
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